Delhi Fire : दिल्ली अग्निकांड में गुरुग्राम के CA परिवार के 8 लोगों की दर्दनाक मौत, उजड़ गया हंसता-खेलता आशियाना

Delhi Fire : नियति का क्रूर खेल और प्रशासनिक लापरवाही जब एक साथ मिलती है, तो हँसते-खेलते परिवार पल भर में इतिहास बन जाते हैं। दिल्ली के साकेत के पास हौजरानी इलाके से एक ऐसी ही रूह कंपा देने वाली दर्दनाक खबर सामने आई है। यहाँ एक अवैध रेस्तरां-सह-गेस्ट हाउस की इमारत में बुधवार सुबह लगी भीषण आग ने गुरुग्राम के एक प्रतिष्ठित परिवार को पूरी तरह से तबाह कर दिया। इस हृदयविदारक हादसे में चार्टर्ड अकाउंटेंट (CA) विवेक अग्रवाल सहित परिवार के 8 सदस्यों की दम घुटने और झुलसने से मौत हो गई।

विपत्ति का पहाड़ तब टूटा जब पूरा परिवार अस्पताल में जिंदगी की जंग लड़ रहे अपने मुखिया को देखने दिल्ली आया था, लेकिन उन्हें क्या पता था कि मौत अस्पताल के ठीक बाहर उनका इंतजार कर रही है।

पिता की तीमारदारी के लिए दिल्ली में ठहरा था परिवार : Delhi Fire

गुरुग्राम के सेक्टर-46 (मकान नंबर 3169) के रहने वाले 45 वर्षीय सीए विवेक अग्रवाल के पिता राधेश्याम अग्रवाल गंभीर रूप से बीमार हैं। उन्हें तीन दिन पहले ही दिल्ली के मैक्स अस्पताल में भर्ती कराया गया था। पिता की देखरेख के लिए विवेक लगातार गुरुग्राम से दिल्ली आ-जा रहे थे।
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मंगलवार शाम को विवेक अपनी मां प्रेमलता, पत्नी तर्जनी, बड़ी बेटी जीविशा (21), छोटी बेटी वारिया (17) और राजस्थान के किशनगढ़ से आए अपने मामा अशोक गोयल के साथ दिल्ली पहुंचे थे। रात अधिक होने के कारण उन्होंने मैक्स अस्पताल के बिल्कुल सामने स्थित एक गेस्ट हाउस में रुकने के लिए दो कमरे किराए पर ले लिए।

सुबह ही अजमेर से पहुंचे थे मौसा-मौसी : Delhi Fire

बुधवार सुबह करीब सात बजे विवेक के बीमार पिता का हालचाल जानने के लिए उनके मौसा झावेरी लाल और मौसी कमला भी अजमेर से दिल्ली पहुंचे थे। वे सीधे इसी गेस्ट हाउस के कमरे में आए। अभी परिवार एक साथ बैठकर चाय-पानी और बातचीत कर ही रहा था कि अचानक सुबह करीब साढ़े सात बजे पूरी बिल्डिंग में भीषण आग लग गई।
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अवैध रूप से बनी इस इमारत में न तो आग से बचने के पुख्ता इंतजाम थे और न ही बाहर निकलने का कोई सुरक्षित रास्ता। देखते ही देखते पूरी बिल्डिंग धुएं के गुबार और आग की लपटों से घिर गई और पूरा परिवार अंदर ही फंस गया। बुधवार रात आई आधिकारिक रिपोर्ट में परिवार के सभी आठ लोगों की मौत की पुष्टि कर दी गई।

Delhi Fire : हम बेसमेंट में फंस गए हैं, बचा लो…” आखिरी फोन कॉल ने झकझोर दिया

आग लगने के बाद जब अंदर चीख-पुकार मची, तो विवेक अग्रवाल ने बदहवास हालत में दिल्ली के कोटला में रहने वाले अपने ताऊ के बेटे (भाई) को फोन मिलाया। विवेक ने हांफते और रोते हुए फोन पर गुहार लगाई, “भैया, हम सब बेसमेंट में फंस गए हैं, यहाँ बहुत धुआं है, हमें आकर बचा लो…” यह कॉल सुनते ही उनके भाई तुरंत कोटला से हौजरानी के लिए दौड़े। लेकिन दिल्ली के ट्रैफिक और दूरी के कारण जब तक वह मौके पर पहुंचे, तब तक सब कुछ राख हो चुका था। काल के क्रूर थपेड़ों ने उनके पहुंचने से पहले ही पूरे परिवार की सांसें छीन ली थीं।
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“कमरे में सो रहे हैं…” मां की आखिरी बात सुनकर फूट-फूट कर रो पड़े नाना

तर्जनी के पिता (विवेक के ससुर) प्रेम बंसल ने रोते हुए बताया कि बुधवार सुबह 8 बजकर 28 मिनट पर उनकी अपनी बेटी तर्जनी से फोन पर बात हुई थी। तर्जनी ने कहा था कि सफर की थकान के कारण बच्चे और बाकी लोग अभी कमरे में सो रहे हैं। इसके कुछ ही समय बाद पुलिस का फोन आया जिसने प्रेम बंसल के पैरों तले से जमीन खिसका दी।

जब प्रेम बंसल मौके पर पहुंचे तो मंजर देखकर उनकी रूह कांप गई। उनकी बेटी का पूरा संसार उजड़ चुका था। परिवार की बड़ी बेटी जीविशा (एंजल) जो बेंगलुरु से बीटेक कर रही थी, उसे मंगलवार को ही दादा से मिलने के लिए दिल्ली बुलाया गया था। छोटी बेटी वारिया (पर्ल) अभी 11वीं क्लास में थी। इसके अलावा विवेक के मामा अशोक गोयल (किशनगढ़ के मार्बल व्यापारी) और बैंक से रिटायर्ड मौसा झावेरी लाल (निवासी अजमेर) भी इस लापरवाही की आग में होम हो गए।

इस दर्दनाक हादसे ने अवैध रूप से चल रहे कमर्शियल गेस्ट हाउसों और दिल्ली प्रशासन की सुरक्षा व्यवस्था पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

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