Big Action : व्हाट्सऐप चैट लीक होने के बाद गुरुग्राम नगर निगम के 134 क्लर्को का ट्रांसफर

Big Action : नगर निगम गुरुग्राम (MCG) की सबसे कमाऊ और संवेदनशील मानी जाने वाली संपत्तिकर (Property Tax) शाखा में चल रहे भ्रष्टाचार के बड़े सिंडिकेट को ध्वस्त करते हुए निगम प्रशासन ने एक ऐतिहासिक कार्रवाई की है। निगम आयुक्त प्रदीप दहिया के आदेश पर मंगलवार को संपत्तिकर शाखा में तैनात सभी चार जोन के 134 क्लर्कों का एक साथ फेरबदल (Mass Transfer) कर दिया गया।

खास बात यह है कि इनमें से अधिकांश कर्मचारी पिछले 10 वर्षों से एक ही सीट पर कुंडली मारकर बैठे थे और पहली बार इन्हें इस विभाग से बाहर का रास्ता दिखाया गया है। निगम को लगातार शिकायतें मिल रही थीं कि ये क्लर्क आवेदकों के प्रॉपर्टी टैक्स से जुड़े कामों को जानबूझकर लटकाते थे, बिना किसी ठोस कारण के फाइलें रद्द कर देते थे और दलालों के माध्यम से सेटिंग होने पर ही काम आगे बढ़ाते थे।

मोबाइल फोन की जांच में खुली पोल, व्हाट्सऐप चैट बने सबूत

भ्रष्टाचार के बढ़ते मामलों को गंभीरता से लेते हुए निगम आयुक्त ने अतिरिक्त निगम आयुक्त यश जालुका को इस पूरे मामले का नोडल अधिकारी नियुक्त कर जांच सौंपी थी। नोडल अधिकारी की टीम ने पिछले दिनों संपत्तिकर शाखा का औचक निरीक्षण किया। इस दौरान संदिग्ध पाए गए क्लर्कों के मोबाइल फोन को जब जांच के दायरे में लिया गया, तो अधिकारी भी हैरान रह गए।

विभागीय सूत्रों के मुताबिक, क्लर्कों के फोन से प्रॉपर्टी टैक्स की सरकारी फाइलें बाहर (लीक) मिलीं। इसके साथ ही दलालों और बिचौलियों के साथ मिलीभगत, पैसों के लेनदेन और फाइलों को पास कराने को लेकर की गई व्हाट्सऐप चैट व कॉल रिकॉर्डिंग्स के पुख्ता प्रमाण हाथ लगे। इस गंभीर गोपनीय जांच रिपोर्ट के आधार पर सोमवार देर रात अतिरिक्त निगमायुक्त अंकिता चौधरी ने सभी पुराने क्लर्कों को तुरंत प्रभाव से हटाने के लिखित आदेश जारी कर दिए।

प्रॉपर्टी टैक्स शाखा में वर्षों से चल रहे दलालों के इस पुराने नेटवर्क को जड़ से खत्म करने के लिए निगम ने नई रणनीति अपनाई है। हटाए गए क्लर्कों को निगम की अन्य गैर-महत्वपूर्ण शाखाओं में भेज दिया गया है। वहीं उनकी जगह पारदर्शिता लाने के लिए एसएसआई (SSI) कार्यालय, सेनीटेशन मॉनिटरिंग शाखा और स्थापना (Establishment) शाखा के नए कर्मचारियों को संपत्तिकर विभाग की कमान सौंपी गई है।

प्रशासनिक फेरबदल की इस सूची में पक्के (नियमित) कर्मचारियों के साथ-साथ हरियाणा कौशल रोजगार निगम (HKRNL) के तहत अनुबंध पर लगे क्लर्कों को भी बदला गया है, ताकि कोई भी अपनी पुरानी सेटिंग का दोबारा फायदा न उठा सके।

रोज़ाना आते हैं 2,000 से अधिक आवेदन, ऐसे होता था खेल

गुरुग्राम नगर निगम की संपत्तिकर शाखा को चार जोन में विभाजित किया गया है। हर जोन में रोजाना औसतन 500-500 लोग प्रॉपर्टी टैक्स कम कराने, डेटा ठीक करवाने, आईडी में नाम-पता या फोन नंबर बदलवाने के लिए ऑनलाइन और ऑफलाइन आवेदन करते हैं।

आरोप है कि यह क्लर्क जानबूझकर आवेदनों में मामूली कमियां निकालकर उन्हें बिना कारण रिजेक्ट कर देते थे। जब परेशान आवेदक निगम दफ्तर के चक्कर काटता था, तब दलाल सक्रिय होते थे और फाइलों को क्लियर कराने के बदले मोटी रकम की उगाही की जाती थी।

15 दिन पहले ZTO पर भी गिर चुकी है गाज

प्रॉपर्टी टैक्स विभाग में गड़बड़ी का यह कोई पहला मामला नहीं है। इससे पहले निगम आयुक्त ने कड़ा रुख अपनाते हुए जोन-3 के क्षेत्रीय कराधान अधिकारी (ZTO) को भी उनके पद से हटा दिया था। यह अधिकारी महज 15 दिन पहले ही फरीदाबाद नगर निगम से ट्रांसफर होकर गुरुग्राम आए थे। पद संभालते ही उन्होंने बिना किसी ठोस आधार के 200 से अधिक प्रॉपर्टी टैक्स की फाइलों को एक साथ रिजेक्ट कर दिया था, जिस पर तुरंत संज्ञान लेते हुए निगम कमिश्नर ने उन्हें सस्पेंड/पदमुक्त कर दिया था।

संपत्तिकर शाखा में आम लोगों के कार्यों में पारदर्शिता लाने और व्यवस्था को पूरी तरह साफ-सुथरा बनाने के लिए यह व्यापक फेरबदल किया गया है। भ्रष्टाचार और फाइलों को जानबूझकर लटकाने को लेकर लगातार शिकायतें मिल रही थीं, जिन्हें किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।” — प्रदीप दहिया, निगम आयुक्त, गुरुग्राम

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