NEET Paper Leak का कैसे हुआ खुलासा, गुरुग्राम से पकड़े गए BAMS स्टूडेंट की क्या है भूमिका?

NEET Paper Leak : देश की सबसे बड़ी चिकित्सा प्रवेश परीक्षा NEET (UG) 2026 के पेपर लीक मामले में हर दिन चौंकाने वाले खुलासे हो रहे हैं। जांच की आंच अब दिल्ली-एनसीआर तक पहुँच गई है। राजस्थान की स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (SOG) ने तकनीकी इनपुट के आधार पर गुरुग्राम के फर्रुखनगर इलाके से एक BAMS छात्र को गिरफ्तार किया है, जिससे इस बड़े रैकेट की कड़ियों को जोड़ने में मदद मिल रही है।

कैसे हुआ पेपर लीक का पर्दाफाश?

जांचकर्ताओं के अनुसार, पेपर लीक का असली खुलासा राजस्थान में एक व्हाट्सएप मैसेज के नीचे लिखे ऑटोमैटिक नोट ‘Forwarded many times’ से शुरू हुआ। एक संदिग्ध ‘गेस पेपर’ की जांच के दौरान पुलिस को यह मैसेज मिला, जिससे साफ हो गया कि मामला किसी छोटे स्तर का नहीं, बल्कि एक सुनियोजित नेटवर्क का है।

सीकर के एक शिक्षक ने इस मामले में सबसे पहले हिम्मत दिखाई। उन्हें उनके मकान मालिक ने एक हाथ से लिखा हुआ ‘गेस पेपर’ दिखाया था, जो उनके बेटे ने केरल से भेजा था। जब शिक्षक ने इसकी जांच की, तो पाया कि इसमें दिए गए सवाल हूबहू असली परीक्षा जैसे थे। उन्होंने तुरंत पुलिस और बाद में नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) को 60 पन्नों की एक विस्तृत PDF फाइल के साथ शिकायत भेजी, जिसमें केमिस्ट्री और बायोलॉजी के असली सवाल मौजूद थे।

गुरुग्राम का ‘यश’ और उसकी भूमिका

गुरुग्राम के खुरमपुर गांव का रहने वाला यश, जो उत्तराखंड के एक मेडिकल कॉलेज में प्रथम वर्ष का छात्र है, इस पूरे सिंडिकेट की एक महत्वपूर्ण कड़ी माना जा रहा है।

  • संपर्क: यश सीकर में रहकर कोचिंग लेता था, जहाँ वह इस गिरोह के संपर्क में आया।

  • भूमिका: पुलिस को शक है कि यश के पास परीक्षा से पहले ही पेपर पहुँच चुका था। वह मुख्य गिरोह और परीक्षार्थियों के बीच ‘मिडिल मैन’ के रूप में काम कर रहा था और उसने यह पेपर अन्य लोगों तक पहुँचाया।

15 लाख में हुई डील और ‘गेस पेपर’ की आड़

SOG के सूत्रों के मुताबिक, इस पेपर को सिंडिकेट ने बड़े पैमाने पर भुनाने की योजना बनाई थी:

  1. बड़ी रकम: एक-एक पेपर की कॉपी 10 से 15 लाख रुपए में बेची गई।

  2. स्मार्ट तरीका: माफिया ने असली पेपर को सीधे नहीं बेचा, बल्कि इसे ‘गेस पेपर’ का नाम दिया।

  3. असली सवाल: इस कथित गेस पेपर में 400 से अधिक सवाल थे, लेकिन उनके बीच बायोलॉजी के सभी 90 और केमिस्ट्री के 45 असली सवाल छिपे हुए थे।

अब CBI के पास है कमान

इस मामले की गंभीरता और लाखों छात्रों के भविष्य को देखते हुए, NTA ने 12 मई को परीक्षा रद्द करने का फैसला लिया था। अब पूरे मामले की जांच CBI को सौंप दी गई है। SOG ने पैसों के लेन-देन के डिजिटल सबूत भी CBI के साथ साझा किए हैं ताकि इस रैकेट में शामिल डॉक्टरों, कोचिंग सेंटर मालिकों और अन्य बड़े नामों को बेनकाब किया जा सके।

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