Siren : गुरुवार सुबह यदि आप गुरुग्राम की सड़कों पर सायरन की आवाज सुनें या भारी पुलिस बल और रेस्क्यू टीमों की हलचल देखें, तो घबराएं नहीं। यह हरियाणा सरकार और नेशनल डिज़ास्टर मैनेजमेंट अथॉरिटी (NDMA) द्वारा आयोजित अब तक का सबसे बड़ा ‘बाढ़ मॉक ड्रिल’ अभ्यास है।
गुरुग्राम प्रशासन कल सुबह ठीक 9 बजे सायरन बजाकर इस महा-अभ्यास की शुरुआत करेगा। इसका उद्देश्य मानसून से पहले शहर की तैयारियों को परखना और आपदा की स्थिति में विभागों के आपसी तालमेल को मजबूत करना है।
इन जगहों पर रहेगा विशेष ‘एक्शन’ (Incident Sites)
प्रशासन ने शहर के उन संवेदनशील इलाकों को चुना है जहाँ अक्सर जलभराव की समस्या रहती है। इन जगहों पर बाढ़ जैसी काल्पनिक स्थिति (Fake Scenario) बनाकर बचाव कार्य किया जाएगा:
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अंडरपास: डीएलएफ फेज-1 अंडरपास और सिग्नेचर टावर अंडरपास।
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सेक्टर एरिया: सेक्टर-43 और सेक्टर-27।
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वॉटर बॉडी: बसई का तालाब (पोंड)।
तैयारियों का ‘ब्लूप्रिंट’: स्टेडियम से लेकर रिलीफ सेंटर तक
डीसी उत्तम सिंह के नेतृत्व में जिला प्रशासन ने पूरी योजना तैयार कर ली है:
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स्टेजिंग एरिया: ताऊ देवी लाल स्टेडियम को मुख्य केंद्र बनाया गया है, जहाँ से रेस्क्यू टीमें रवाना होंगी।
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रिलीफ सेंटर: सेक्टर-31 स्थित पॉली क्लिनिक में प्रभावित लोगों के लिए राहत शिविर का अभ्यास होगा।
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कंट्रोल रूम: लघु सचिवालय में स्थित इमरजेंसी ऑपरेशन सेंटर (EOC) से हर गतिविधि पर सीधी नजर रखी जाएगी।
क्यों जरूरी है यह ड्रिल?
मानसून के दौरान गुरुग्राम में अक्सर सड़कें और अंडरपास दरिया बन जाते हैं। इस ड्रिल के जरिए प्रशासन यह चेक करेगा कि:
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क्या हमारी रेस्क्यू टीमें समय पर पहुँच पा रही हैं?
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क्या मेडिकल हेल्प और प्राथमिक उपचार की व्यवस्था दुरुस्त है?
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विभिन्न विभागों के बीच तालमेल कैसा है?
नागरिकों के लिए विशेष अपील
प्रशासन ने अपील की है कि मॉक ड्रिल के दौरान चिन्हित किए गए इलाकों में ट्रैफिक डायवर्जन या थोड़ी देरी हो सकती है, इसलिए सहयोग करें। सायरन की आवाज सुनकर पैनिक न हों और इसे केवल एक सुरक्षा अभ्यास के रूप में लें।
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