Nuh Hospital Incident : इलाज के बजाय फोन पर व्यस्त रहा डॉक्टर, लापरवाही से मासूम की मौत हुई

Nuh Hospital Incident : हरियाणा के नूंह (मेवात) जिले के मुख्य स्वास्थ्य केंद्र, जिला नागरिक अस्पताल मांडीखेड़ा में डॉक्टरों की कथित संवेदनहीनता और लापरवाही का एक और बेहद दर्दनाक मामला सामने आया है। मंगलवार देर रात अस्पताल में इलाज के अभाव में एक 10 महीने के मासूम बच्चे ने दम तोड़ दिया।

परिजनों का गंभीर आरोप है कि जब बच्चा जिंदगी और मौत के बीच जूझ रहा था, तब ड्यूटी पर तैनात डॉक्टर फोन पर बातचीत करने में व्यस्त था। मासूम की मौत के बाद गुस्साए परिजनों और स्थानीय लोगों ने अस्पताल परिसर में जमकर हंगामा किया और प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की। इस पूरी घटना का एक वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है, जिसने स्वास्थ्य व्यवस्थाओं पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

मृतक बच्चे के पिता ने आंखों में आंसू लिए अस्पताल प्रबंधन पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने बताया कि देर रात बच्चे को अचानक तेज बुखार आया, जिसके बाद उसकी हालत बिगड़ने लगी। परिजन तुरंत उसे लेकर मांडीखेड़ा अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड पहुंचे।

 आरोप है बच्चे की हालत लगातार नाजुक हो रही थी। हमने ड्यूटी डॉक्टर से बार-बार मिन्नतें कीं कि बच्चे को देख लें, लेकिन डॉक्टर फोन पर बात करने में मशगूल था। वह हर बार यही कहता रहा कि ‘5-10 मिनट में आ रहा हूँ’। करीब डेढ़ घंटे तक डॉक्टर ने मेरे बच्चे को छूकर तक नहीं देखा।

परिजनों के अनुसार, जब काफी देर हो गई और बच्चे के शरीर में कोई हलचल नहीं हुई, तो वे दोबारा डॉक्टर के पास भागे। लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी और मासूम दम तोड़ चुका था। परिजनों का कहना है कि मौत की पुष्टि होने के बाद डॉक्टर अचानक हरकत में आया और बच्चे को अंदर ले जाकर इलाज करने की बात कहने लगा। इस बात पर परिजनों का गुस्सा फूट पड़ा। उन्होंने कहा कि जब बच्चा जीवित था और सांसें चल रही थीं, तब इलाज नहीं मिला; अब मौत के बाद इस नाटक का क्या फायदा?

घटना के बाद अस्पताल परिसर में तनाव का माहौल बन गया। सैकड़ों की संख्या में ग्रामीण और स्थानीय लोग अस्पताल पहुंच गए और स्वास्थ्य विभाग के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। लोगों का कहना था कि मांडीखेड़ा अस्पताल में इस तरह की लापरवाही अब आम बात हो चुकी है और गरीब मरीजों की जान से खिलवाड़ किया जा रहा है।

हालांकि, सूत्रों के अनुसार मामला बढ़ता देख और कानूनी कार्रवाई के डर से डॉक्टरों ने परिजनों और उनके साथ आए मौजिज लोगों के साथ बातचीत कर मामले को आपसी सहमति (फैसले) से रफा-दफा करने का प्रयास किया।

जिला नागरिक अस्पताल मांडीखेड़ा पहले भी कई बार गंभीर लापरवाही को लेकर सुर्खियों में रह चुका है। दोहा गांव की निवासी सरजीना नामक महिला की डिलीवरी के दौरान कथित तौर पर नवजात शिशु का हाथ कटने का सनसनीखेज मामला सामने आया था, जिसे लेकर हफ्तों विवाद चला था।

करीब दो साल पहले पिनगवां क्षेत्र की एक गर्भवती महिला की भी डॉक्टरों की कथित लापरवाही और समय पर रेफर न करने की वजह से मौत हो गई थी। स्थानीय निवासियों का कहना है कि इन सब घटनाओं के बावजूद जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग कोई ठोस कदम नहीं उठा रहा है, जिससे स्वास्थ्य कर्मचारियों के हौसले बुलंद हैं।

मामले के बारे में जैसे ही मुझे जानकारी मिली, तुरंत जांच के आदेश दे दिए गए हैं। इस पूरे प्रकरण की गहनता से जांच कराई जाएगी और जो भी तथ्य सामने आएंगे, उसके आधार पर दोषी के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी।

डॉ. ज्योत्सना, सिविल सर्जन, नूंह

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