Major Scam : साइबर सिटी में घर-घर से कचरा उठाने की व्यवस्था में निजी एजेंसियों की एक और बड़ी धांधली (Major Scam) का खुलासा हुआ है। नगर निगम द्वारा शहर के सभी आठ जोन में चलाए गए विशेष जांच अभियान के दौरान कूड़ा एकत्रित करने में लगी करीब 38 से 48 प्रतिशत गाड़ियां कागज़ों में ही चलती पाई गईं। इस बड़े फर्जीवाड़े (Major Scam) को गंभीरता से लेते हुए नगर निगम की मेयर राज रानी मल्होत्रा ने दोषी एजेंसियों को सोमवार तक निर्धारित संख्या के अनुसार वाहनों को धरातल पर उतारने का अंतिम अल्टीमेटम दिया है।
Major Scam : कागजों में 591 वाहन, धरातल पर मिले सिर्फ 369
नगर निगम ने शहर भर से कूड़ा उठाने के लिए निजी एजेंसियों को करीब ₹23 करोड़ का टेंडर दिया है। नियमों के अनुसार, टेंडर की शर्तों के तहत एजेंसियों को पूरे शहर में रोज 591 वाहन तैनात करने थे। लेकिन बुधवार को जब निगम की टीमों ने ताऊ देवीलाल स्टेडियम में वाहनों की भौतिक जांच (Physical Verification) की, तो 591 की जगह मौके पर केवल 369 वाहन ही पहुंचे।
जोन-6 की बात करें तो यहां अनुबंध के तहत 53 वाहन लगने थे, लेकिन मौके पर सिर्फ 40 वाहन ही कार्यशील पाए गए। यानी सीधे तौर पर 13 गाड़ियां कम मिलीं। जांच के दौरान यह स्पष्ट हुआ कि ठेकेदार कम गाड़ियां लगाकर केवल कागजों में खेल कर रहे थे, जबकि जनता को कचरा न उठने से भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा था।
Major Scam : अवैध वसूली और अवैध वेंडरों पर भी कसता शिकंजा
जांच में यह बात भी सामने आई है कि कुछ सेक्टरों (जैसे सेक्टर-9 और 9ए) में निजी वेंडरों द्वारा लोगों से कूड़ा उठाने के नाम पर अवैध वसूली की जा रही है। नगर निगम के कर्मचारी अब घर-घर जाकर सर्वे कर रहे हैं और निवासियों से जानकारी जुटा रहे हैं, ताकि कूड़ा उठाने के नाम पर चल रहे इस अवैध खेल को पूरी तरह बंद कराया जा सके।
Major Scam : सोमवार तक का अल्टीमेटम: भारी जुर्माना और ब्लैकलिस्टिंग की चेतावनी
ताऊ देवीलाल स्टेडियम में औचक निरीक्षण के दौरान मेयर के साथ निगम पार्षद परमिंदर कटारिया, आशीष गुप्ता, रुचि गगनदीप और एसएसआई ऋषि मलिक भी मौजूद रहे।
Major Scam : निरीक्षण के बाद मेयर राज रानी मल्होत्रा ने स्पष्ट संदेश दिया है:
“नागरिकों को गुणवत्तापूर्ण सफाई सेवाएं देना निगम की पहली प्राथमिकता है। टेंडर लेने के बाद एजेंसियां कम गाड़ियां लगाकर धांधली कर रही हैं। यदि सोमवार तक शहर के हर जोन में शत-प्रतिशत वाहन तैनात नहीं किए गए, तो संबंधित ठेकेदारों पर भारी आर्थिक दंड (जुर्माना) लगाया जाएगा और उन्हें तुरंत प्रभाव से ब्लैकलिस्ट किया जाएगा। इसके अलावा, लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों की भी जवाबदेही तय होगी।”
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