700 CCTV Camera करेंगे मानसून जलभराव की निगरानी: नगर निगम का नया ‘तमाशा’! क्या तैरने से बच जाएगा गुरुग्राम?

CCTV Camera : हर साल मानसून आते ही ‘वेनिस’ में तब्दील हो जाने वाली देश की हाईटेक साइबर सिटी गुरुग्राम को जलभराव से बचाने के लिए नगर निगम ने इस बार एक नया फॉर्मूला निकाला है। निगम प्रशासन अब ट्रैफिक मैनेजमेंट के लिए लगाए गए 700 सीसीटीवी (CCTV Camera) कैमरों से पानी डूबते रास्तों की निगरानी करेगा। जनता इसे निगम का ‘नया तमाशा’ कह रही है, तो वहीं प्रशासनिक अमले का दावा है कि जैसे ही कैमरों में जलभराव दिखेगा, टीमें तुरंत पंप लेकर मौके पर पहुंच जाएंगी। बुधवार को नगर निगम आयुक्त प्रदीप दहिया ने मानसून तैयारियों को लेकर अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक की, जिसमें इस ‘हाईटेक’ CCTV Camera निगरानी योजना पर मुहर लगाई गई।

CCTV Camera सिर्फ जलभराव दिखाएंगे या समाधान भी करेंगे?

नगर निगम का प्लान है कि इन 700 कैमरों के जरिए शहर के चप्पे-चप्पे पर नजर रखी जाएगी। इसके अलावा फ्लड डेप्थ सेंसर और एक सेंट्रलाइज्ड मॉनिटरिंग सिस्टम भी बनाया जा रहा है। लेकिन बड़ा सवाल यह है कि जब शहर के ड्रेनेज सिस्टम का ढांचा ही हर साल जवाब दे जाता है, तो सिर्फ स्क्रीन पर पानी भरते हुए लाइव देखना समाधान कैसे बनेगा? क्या पानी देखकर निगम के पंप उसे जादू से गायब कर देंगे?


गुरुग्राम में 155 ‘डेंजर जोन’ चिह्नित

अधिकारियों ने बैठक में खुलासा किया कि इस बार शहर में कुल 155 जलभराव वाले हॉटस्पॉट की पहचान की गई है। इन्हें गंभीरता के आधार पर तीन श्रेणियों में बांटा गया है:

  • हाइपर क्रिटिकल (अत्यधिक संवेदनशील): 41 पॉइंट

  • मध्यम श्रेणी: 54 पॉइंट

  • सामान्य श्रेणी: 60 पॉइंट

दावा है कि इन सभी जगहों पर ड्रेनेज सुधार और सीवर सफाई का काम 31 मई तक हर हाल में पूरा कर लिया जाएगा।


कागजी आंकड़ों में ड्रेनों की सफाई

बैठक में सफाई के जो आंकड़े पेश किए गए, वे सुनने में बेहद शानदार हैं:

  • शहर में कुल 607 किलोमीटर लंबी स्टॉर्म वाटर ड्रेन (बरसाती नाले) हैं।

  • निगम के मुताबिक, 408.59 किलोमीटर नालों की सफाई पूरी हो चुकी है।

  • बचे हुए काम को पूरा करने के लिए 15 जून की डेडलाइन तय की गई है।

  • इसके साथ ही सीवर सफाई के लिए 56 टेंडर जारी किए जा चुके हैं।


क्रिटिकल पॉइंट्स पर CCTV Camera की विशेष नजर और वार्ड स्तर पर फौज तैयार

पिछले मानसून की फजीहत से सबक लेते हुए निगम ने 40 ऐसे क्रिटिकल सीवरेज पॉइंट्स की पहचान की थी, जहां सबसे ज्यादा ब्लॉकेज होती है। अधिकारियों का कहना है कि इनमें से 23 पॉइंट्स पर काम पूरा हो चुका है।

इसके अलावा मानसून के दौरान ‘इमरजेंसी एक्शन’ के लिए वार्ड स्तर पर संसाधनों की फौज तैनात करने का दावा किया गया है:

  • मैनपावर: 269 सीवरमैन और 119 बेलदार तैनात रहेंगे।

  • मशीनरी: 84 सक्शन टैंकर, 89 ट्रैक्टर माउंटेड पंप और त्वरित कार्रवाई के लिए अलग से 109 पंपों की व्यवस्था की गई है।


जनता का सवाल: हर बार दावे हजार, फिर क्यों डूबता है शहर?

निगम कमिश्नर ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि मानसून आने से पहले सारे तकनीकी और जमीनी काम पूरे हो जाने चाहिए। लेकिन गुरुग्राम के लोग भली-भांति जानते हैं कि हर साल करोड़ों के टेंडर छूटते हैं, बैठकें होती हैं और बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं। अब देखना यह होगा कि इस बार 700 कैमरों का यह ‘हाईटेक तमाशा’ साइबर सिटी को घुटने भर पानी और मीलों लंबे जाम से बचा पाता है या फिर पहली ही बारिश में निगम के ये दावे हमेशा की तरह पानी में बह जाएंगे।

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